(1)
उपचारात्मक शिक्षण की प्रक्रिया कब तक चलती रहनी चाहिए।
(1) जब तक छात्रों का पिछड़ापन दूर न हो जाए।
(2) जब तक छात्र रूचि ले।
(3) जब तक विद्यालय में समय मिलें।
(4) जब तक अध्यापक चाहे।
(2)
हिन्दी शिक्षण दुर्बल एवं मंद बुद्धि छात्रों के लिए कौनसी विधि उपयुक्त है।
(1) प्रश्नोत्तर विधि
(2) लेख विधि
(3) पुस्तक विधि
(4) समस्या विधि
(3)
सुनकर अर्थग्रहण करना उद्देश्य का व्यवहारगत परिवर्तन क्या होगा।
(1) छात्र विश्लेषण करेगें।
(2) तुलना कर सकेगें।
(3) श्रुत सामग्री का भाव ग्रहण करेगें।
(4) क्रमबद्धता से लिख सकेगें।
(4)
मापन किया जाता है।
(1) मूल्यांकन में
(2) कक्षा शिक्षण में
(3) निदानात्मक परीक्षण में
(4) वार्षिक परीक्षा में
(5)
नाटक शिक्षण की उपयुक्त विधि है।
(1) रंगमंच विधि
(2) अर्थबोध प्रणाली
(3) कक्षा अभिनय विधि
(4) व्याख्या प्रणाली
(6)
उच्च प्राथमिक स्तर पर कविता शिक्षण की उपयुक्त विधि है।
(1) प्रश्नोत्तर प्रणाली
(2) व्याख्या प्रणाली
(3) गीत प्रणाली
(4) शब्दार्थ प्रणाली
(7)
कहानी शिक्षण का प्रमुख उद्देश्य है।
(1) समय के सदुपयोग की शिक्षा देना।
(2) रसानुभूति की क्षमता का विकास करना।
(3) बालकों का मनोरंजन करना।
(4) विषय वस्तु का ज्ञान प्राप्त करना।
(8)
व्यावहारिक व्याकरण शिक्षण की सर्वाधिक उपयुक्त प्रविधि है।
(1) विषय का अभ्यास
(2) उदाहरणों की प्रस्तुति
(3) सिद्धांत निरूपण
(4) प्रासंगिक कथन
(9)
जिस क्रिया में यह पता लगाया जाता है कि बालक भाषा के किस क्षेत्र में कमजोर रहते है। यह क्रिया कहलाती है।
(1) लिखित कार्य
(2) मौखिक कार्य
(3) निदानात्मक कार्य
(4) उपचारात्मक कार्य
(10)
शिक्षण प्रक्रिया में मूल्यांकन आवश्यक है-
(1) पाठ्यक्रम में सुधार के लिए
(2) छात्रों की उपलब्धि का स्तर जानने के लिए
(3) शिक्षण कार्यो में सुधार के लिए
(4) उपर्युक्त सभी कार्यो के लिए
(11)
मूल्यांकन से अभिप्राय है-
(1) उपर्युक्त सभी
(2) निरंतर चलने वाली प्रक्रिया
(3) उद्देश्यों की पूर्ति का सीमांकन
(4) वांछित व्यवहारगत परिवर्तनों की जानकारी
(12)
हिन्दी शिक्षक में कौनसे विशिष्ट गुण की अपेक्षा की जाती है।
(1) वेश-भूषा
(2) कुशल अभिव्यक्ति की
(3) चित्रकारी की
(4) अधिक बोलने की
(13)
पाठ योजना में निहित प्रस्तावना सोपान किस शिक्षण सूत्र पर आधारित है-
(1) सूक्ष्म से स्थूल की ओर
(2) ज्ञात से अज्ञात की ओर
(3) सामान्य से विशिष्ट की ओर
(4) सरल से जटिल की ओर
(14)
प्राथमिक पाठशाला में भाषा पढ़ाई जाती है क्योंकि-
(1) बालक विद्वान बन सके।
(2) बालक जीवनयापन कर सके।
(3) बालक अन्य विषयों में निपुण हो सकें।
(4) बालक भाषा में निपुण हो सके।
(15)
मानक भाषा के लिए आवश्यक शर्त है-
(1) व्याकरण सम्मत होना।
(2) वृहत समाज द्वारा उपयोग करना।
(3) उपर्युक्त सभी
(4) शिक्षित वर्ग की प्रिय भाषा होना।
(16)
राष्ट्रभाषा का तात्पर्य नही है।
(1) देश में अधिकतर लोगों की भाषा
(2) जनसामान्य की बोलचाल की भाषा
(3) इनमें से कोई नही।
(4) सरकारी कार्यो की भाषा
(17)
मातृभाषा को शिक्षा का केन्द्र बिन्दु माना जाता है क्योंकि यह-
(1) सम्पूर्ण समाज के केन्द्र में रहती है।
(2) सम्पूर्ण पाठ्यक्रम के केन्द्र में स्थित रहती है।
(3) सम्पूर्ण विद्यालय जीवन का केन्द्र है।
(4) सम्पूर्ण बालक के जीवन के विकास का केन्द्र है।
(18)
पाठ्य पुस्तक की भाषा -
(1) बच्चों की घर व समुदाय की भाषा से मिलती जुलती होनी चाहिए।
(2) तत्सम प्रधान होनी चाहिए
(3) तद्भव प्रधान होनी चाहिए
(4) अधिकाधिक कठिन शब्दों से युक्त होना चाहिए
(19)
प्राथमिक स्तर पर 'भाषा सिखाने' से तात्पर्य है।
(1) भाषा का व्याकरण सिखाना
(2) उच्चस्तरीय साहित्य पढ़ाना
(3) भाषा का प्रयोग सिखाना
(4) भाषा वैज्ञानिक तथ्य स्पष्ट करना
(20)
प्राथमिक स्तर पर हिन्दी 'भाषा शिक्षण' के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण है।
(1) पाठ्य पुस्तक
(2) भाषा प्रयोग के अवसर
(3) उच्चस्तरीय तकनीकी यंत्र
(4) व्याकरणिक नियमों का स्मरण